दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति दिनेश सिंह की सेवा-निवृत्ति: अलविदा कहने की इच्छा तो नहीं, मगर वक्त हमेशा बीत जाता है

धुंधली नहीं हुई है अभी,आइने की तरह साफ़ है। यादों मे मेरे वो दिन,जब ज्ञानोदय 2014 का, सफ़र शुरू हो गया था । ज्ञानोदय एक्सप्रेस मे बैठे हज़ारों छात्र व कई शिक्षकों से मिलकर सबकी ख़ैरियत पूछने की प्रवर्ति ने मेरे दिल पर आपकी अमिट छाप छोड़ दी।महज दस मिनट का तो समय दिया था आपने हमें मगर उस दौरान ही हमें जिस असाधारण व्यक्तित्व व अद्वित्य तेज से रूबरू होने का मोका मिला वह आज भी ज्ञानोदय के साथियों के बीच चर्चा का विषय है।

दिल्ली विश्वविद्यालय से ही शिक्षा प्राप्त कर इसे ही अपनी कर्मभूमि बनाया । ये हमारे लिए सौभाग्य की बात है,कि पदम् श्री से सम्मानित आप प्रोफेसर दिनेश सिंह के कुलपति रहते हम दिल्ली विश्वविद्यालय मे शिक्षा प्राप्त कर रहें। एक नीति निर्माता के रूप मे आपकी काफी भर्त्सना की गयी। जब चतुष्वर्गीय अंतरस्नातक कार्यक्रम (FVUP) को डीयू की ज़मीन पर प्रयोग में लाया गया। जिस तथ्य के आधार पर इस कार्यक्रम को गलत दिखाया जा रहा था- वह शर्मनाक है।

राजनीतिक दलों न अपने महत्वाकांक्षा की आग मे हमारे भविष्य को राख कर दिया और FYUP हटा दिया गया। मीडिया में क्या कहा गया इससे मुझे मतलब नहीं, वर्ग की चारदीवारी के अंदर मैंने समूची दुनिया को समाते हुए देखा है,सिर्फ सोसाइटी की मीटिंग नहीं,बल्कि हर दिन प्रतिभा को तरासने का प्लेटफ़ॉर्म बनते देखा है,कलतक दस व्यक्तियों के बीच ठीक से हिंदी ना बोलने वालों को 50-60 लोगों के सामने अंग्रेजी भाषा मे प्रेंजेंटेशन देते देखा है,विभिन्न मुद्दों पर बकवास नहीं, सार्थक बहस होते देखा है-कुछ ऐसा था FYUP । और मुझे नहीं लगता की चाहे कोई भी राजनैतिक दल हो या दबाव समूह, अगर वह निष्पक्ष है तो मेरे इन तथ्यों से इतेफ़ाक ना रखता हो । मैं बहुत आभारी था अपने कुलपति जी से जो FYUP जैसे कार्यक्रम को दिल्ली विश्वविद्यालय की शिक्षा की कसौटी पर कसने की कोशिश की. मगर देश की राजनीति ने अपने स्वार्थ, अभिमान व महत्वाकांक्षा के लिए जो 2014-15 बैच में नामांकन करवाने वाले विद्यार्थियों के भविष्य के साथ जो खिलवाड़ किया है वह अक्षम्य है!

कई आरोप लगते आए हैं – तानाशाह, अराजक इत्यादि के, मगर मेरा मानना है की देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय को संभालना है तो कहीं लचीला,तो कहीं कठोर होना आवश्यक है. लचीला या नर्म होना ना सिर्फ़ ज्ञानोदय बल्कि तीन साल अंर्तध्वनी में आपसे मुलाकात में देखा और कठोर होने की चर्चा आपके आलोचक यूँ ही सार्वजनिक कर देते हैं.

तीन साल में एक कुलपति के रूप में मैने सिर्फ़ आपको ही देखा । आपकी कार्यशैली, व्यक्तित्व, तेज़, निर्णय लेने की त्वरित क्षमता आदि ने आपको मेरा आदर्श बना दिया है। अलविदा कहने की इच्छा तो नहीं, मगर वक्त हमेशा बीत ही जाता है और हमें पता नहीं चलता।’छोटी मुँह-बड़ी बात’ हो जाएगी , मगर रब से प्राथना करूँगा की आपकी आगे की जिंदगी सुख चैन और शांति से बीते और हमें आप जैसे अनुभवी, जोश से ओत-प्रोत, सेवानिव्रिति की उम्र तक भी युवा विचार वाले इंसान की छत्र-छाया मिलती रहे । आगामी जिन्दगी की मंगलकामनाएं ।

[author image=”http://www.aapkatimes.com/wp-content/uploads/2015/10/Kumar-shubham.jpg” ]Kumar Shubham is pursuing History H from Hindu college, Delhi university. An amazing debater and a brilliant actor who can do miracles with his creativity. Extremely sensitive towards social issues, he wants to change India for good. [/author]