दिल्ली मे बदलाव का समय.

नेहा परवीन.

नई दिल्ली: दिल्ली में 70 सीटो के लिए विधान सभा चुनाव मे जो नतीजे आए है उन नतीजो ने यह साबित कर दिया कि दिल्ली की जनता को सरकार मे बदलाव चाहिए। यानि जनता अब हर किसी को मौका दे कर देश मे बदलाव मांग रही है।तीन सालो से आसित्तव में आर्इ आप पार्टी ने दिल्ली की जनता के मन में खुद को बसा कर जनता के दिलो दिमाग मे बदलाव का असर डाल दिया।विधानसभा चुनावो का जो फैसला आया है उसने एक जमी जमार्इ नीव को हिलाकर रख दिया जिन 15 सालो से कांग्रेस पार्टी दिल्ली पर अपना ढेरा जमाकर बैठी थी उस ढेरे को आम आदमी ने बिखेर कर रख दिया।किसी को उम्मीद भी न थी कि एक आम आदमी पार्टी कब खास बन जाएगी और आज दिल्ली का सीएम बनने के मोड़ पर खडी होजाये गी।चुनाव मे आमआदमी पार्टी ने जो अपनी शानदार जीत दर्ज करार्इ है उससे यह तो साबित हो गया कि बदलाव का समय आ गया है.दिल्ली की अवाम बहुत बढ़ा बदलाव चाहती है जिस तरह के नतीजे सामने आए है।उससे तो यही लगता है कि अब वकत आम आदमी का है।चुनाव मे जिस पार्टी को सबसे ज़्यादा सीटे मिली है वो बीजेपी पार्टी है बीजेपी को दिल्ली में 31 सीटे मिली है वैसे तो बीजेपी ने विधान सभा चुनाव के सभी राज्यो मे अपनी बढ़त काफी अच्छी बनार्इ है पर दिल्ली में वो चार सीटो से पीछे रह गर्इ और आम आदमी ने दिल्ली में 28 सीटे प्राप्त की है जब कि कांग्रेस को मात्र 8 सीटे मिली है दिल्ली मे सरकार बनाने के लिए बहुमत 36 का होना अनिवार्य है।कांग्रेस जीत की लार्इन से कौसो मिल दूर चली गई है. काग्रेस अपने वोट इन पार्टीयों की टक्कर मे तो दूर वह इनके बराबर भी बटोरने मे नकाम रही जबकि बीजेपी और आम आदमी पार्टी जीत के करीब होते हुए भी पूरी तरह सफल नही हो पार्इ लेकिन आम आदमी पार्टी ने जो अपने घोड़े इन चुनावी मैदान में दौड़ाकर जो वोट पाए है वो वाकर्इ काबिले तारीफ है पहली बार चुनावी मैदान में उतरी इस पार्टी दिल्ली के मतदान में दुसरे नंबर पर आकर सभी को हैरान कर दिया जिस पार्टी को कांग्रेस ने प्रतियोगिता की फेहरिस्त से बाहर रखा था आज उसी पार्टी ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया।केजरीवाल ने अपनी झाड़ु ऐसी चलार्इ कि दिल्ली से कांग्रेस का सफाया ही कर डाला जिस समय आम आदमी पार्टी बनी थी उस समय सभी दिग्गज पार्टिया इसे हल्के मे ले रही थी और लेती भी क्यो न क्योकि इन बड़ी राजनितिक पार्टीयो ने अपनी पकड़ अच्छी बना रखी है जिसके चलते आम आदमी पार्टी को जनता को स्वीकार करना कुछ आसंभव सा लग रहा था और खुद केजरीवाल को भी नही पता था कि उन की पार्टी को दिल्ली से इतने वोट मिलेगे भी या नहीं लेकिन पिछले तीन-चार सालो में केजरीवाल ने जिसतरह से अपनी राजनीतिक नीतियों का पिटारा खोला और खुद को आम आदमी बता कर आमलोगो की समस्याओ को उजागर करते हुए जनता को उन समस्याओ से निपटारे का साधन खुदको बताते हुए जनता का विषवास पूरी तरह से पाने में सफल हो गये ।कांग्रेस की हार का सबसे बढ़ा कारण उसकी खुद की नीतिया रही और देश के उन गंभीर मुददो को सुलझाने में वो नकाम रही ,हालांकि कांग्रेस सरकार ने कोशिस तो बहुत की लेकिन उन कोशिसो में कहीं न कहीं कमी रह गर्इ जिसका परिणाम आज सबके सामने है इस समय का सबसे बढ़ा मुददा महंगार्इ है और इस महंगार्इ का ही असर कांग्रेस सरकार पर बहुत महंगा पड़ा।महंगार्इ एक ऐसा मुददा है जो सीधा आम लोगो से जुड़ता है आज के हलात में बढ़ती महंगार्इ सब के लिए परेशानियों का सबब बनी हुर्इ है बरहाल यहां हम महंगार्इ के चक्कर पर न पड़ते हुए आगे बढ़तेहै यानि दिल्ली में बदलाव होगा अब देखना यह है कि बदलाव किस पार्टी के हाथो होगा क्यो कि अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि दिल्ली में सरकार किस की बनेगी क्योकि केजरीवाल तो किसी को समर्थन देने को तैयार नही है,और बीजेपी केवल 5 सीटो से पीछे है 3 अन्य सीटो का भी समर्थन मिलने पर बीजेपी सरकार नहीं बना पायेगी.तो ऐसे में किसी न किसी पार्टी को समर्थन देना पड़ेगा या फिरसे महीने बाद दोबरा चुनाव होने की संभावना बनी रहेगी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि बदलाव के समय में बदलाव किस के हाथो होगा।