आज़ादी का सही मतलब क्या है?

आइये आपको बता दें की JNU के छात्र जो आज़ादी के नारे लगते हैं उनका असली मतलब क्या है… भारत मांगे आज़ादी का मतलब यह नहीं की पूरा भारत उठ कर पाकिस्तान चल दे या कश्मीर मांगे आज़ादी का भी यह मतलब नहीं की पूरा कश्मीर पाकिस्तान चल दे. हाँ कुछ ऐसी सोच के समर्थक भी हैं जो कश्मीर को भारत से अलग कर देना चाहते हैं, हम भारत की अखंडता और एकता में विश्वास रखते हैं और ऐसे विचार रखने वाले लोगों के खिलाफ हैं और इसलिए बता दे की एक भारत वासी और देश भक्त को किस चीज़ से आज़ादी चाहिएं

हमें चाहिये आज़ादी

भुखमरी से आज़ादी

मनुवाद से आज़ादी

दंगाइयों से आज़ादी

सामन्तवाद से आज़ादी

आतंकवाद से आज़ादी

पूँजीवाद से आज़ादी

मीडिया ने इस आज़ादी शब्द का अच्छा मज़ाक बना दिया है, और अब तो डर भी लगता है की अगर गलती से भी मुहं से आज़ादी शब्द निकल गया तो देश द्रोही न घोषित कर दिया जाए. सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाना कोई जुर्म नहीं है, हम सब देश की तरक्की चाहते हैं. हम में से काफी लोगों ने तो इसी सरकार को वोट भी दिया होगा पर जैसा की एक अच्छे लोक तंत्र में होता है, सरकार की कार्य शैली कुछ लोगों को पसंद आई और कुछ को नहीं. जिन लोगों को पसंद है वह उनके साथ हैं जिनको नहीं पसंद वह विरोध करते हैं तो इसमें लड़ कर या लात घूसे चला कर या डर से अपनी बात मनवाने का हक़ किसी को नहीं है पर हाँ अपनी बात एक सभ्य तरीके से रखने का हक़ सभी को है. अपनी बात सभ्य तरीके से रखने की आज़ादी तो कोर्ट में एक आतंकवादी को भी होती है.

कश्मीर की वास्तविक स्तिथि से तो वाकिफ कश्मीर में रहने वाला इंसान ही है, आये दिन मीडिया में जो खबरें उछलती हैं उन पर भी आँख बंद करके भरोसा नहीं कर सकते पर जब भी देश के किसी कोने में छोटी मोती आग लगती है नेताओं, पत्रकारों और अब तो वकीलों को भी उस में घी नहीं डालना चाहिएं. ऐसा मन जाता है की आग में जो जितना घी डालेगा आग की लपटें उसी को ही सबसे पहले अपनी चपेट में लेंगी.