भारतीय मुसलमानो के पिछड़ेपन का दोषी कौन?? सरकार या खुद मुसलमान?

आज़ादी के 67 साल बाद भी भारत के मुसलमान इतने पिछड़े हुए हैं इसका ज़िम्मेदार कौन है? सरकार या खुद मुसलमान? यह बता पाना बहुत ही मुश्क़ील है क्यूंकि कुछ ग़लती अगर सरकार मे दिखती है तो कुछ ग़लती तो मुसलमानों मे भी दिखती है। आज भारत मे मुस्लिम जनसंख्या देश के जनसंख्या का लगभग 14% है और देश के नौकरशाही मे इनकी हिस्सेदारी सिर्फ 2.5% है जो कि बहुत ही कम है। ऐसे और भी बहुत सारे आंकड़े हैं जो यह दर्शाते हैं भारतीय मुसलमानों कि स्थिति क्या है वहीं कुछ आंकड़ो ने तो यह भी साबित कर दिया है मुसलमान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से भी बदतर है। बात अगर राजनीतिक हिस्सेदारी कि करें तो वहाँ भी मुसलमानों कि हिस्सेदारी भी बहुत ही कम है।

अगर हम देश की जनगणना और निर्वाचन आयोग के आंकड़ों पर नज़र डालेंगे तो पता चलेगा कि देश मे कितने ग़लत ढंग से विधानसभा क्षेत्रों का आरक्षण किया गया है। जहाँ मुसलमानों की जनसंख्या अनुसूचित जातियों से बहुत ज्यादा है वह विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और जहाँ अनुसूचित जतियों की जनसंख्या मुसलमानो से बहुत ही ज्यादा है वह विधानसभा क्षेत्र अनारक्षित है।क्या यह मुसलमानो के साथ सरकार का सौतेला व्यवाहार नहीं है?या हम ये कहें तो ग़लत नहीं होगा की मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों को आरक्षित कर के सरकार मुसलमानों की राजनीतिक हिस्सेदारी खत्म करना चाहती है।अगर आरक्षण देना ही है तो अनुसूचित जाति के लोगो को आरक्षण वहाँ क्यूँ नहीं देते जहाँ पर इनकी जनसंख्या ज्यादा है? इनके लिए वहाँ आरक्षण क्यूँ है जहाँ इनकी जनसंख्या ज्यादा है ही नहीं?

आंकड़ो के अनुसार बिहार की धुरैया विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है जहाँ अनुसूचित जाति सिर्फ 10% हैं जबकि मुसलमान 30% हैं और वहीं अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र डुमरिया मे अनुसूचित जाति 39.3% हैं जबकि मुस्लिम सिर्फ 13.4%। अगर बात उत्तर प्रदेश की करें तो नज़बाबाद विधानसभा क्षेत्र भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और वहाँ मुस्लिम जनसंख्या 49.2% है जबकि अनुसूचित जाति मात्र 23% हैं अनारक्षित मरीहान विधानसभा क्षेत्र मे अनुसूचित जाती 49.3% हैं और मुस्लिम मात्र 30.2% हैं। अगर पश्चिम बंगाल के आंकड़ों पर ध्यान दिया जाए तो हमें पता चलेगा की सारादिघी विधानसभा क्षेत्र जो की मुस्लिम बहुल क्षेत्र है जहाँ मुसलमानो कि जनसंख्या 62.2% है और अनुसूचित जाति की जनसंख्या मात्र 17.8% है,उसके बाद भी यह विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और वहीं विधानसभा क्षेत्र सिताई मे अनुसूचित जाति की जनसंख्या 67.3% है उसके बाद भी यह विधानसभा क्षेत्र अनारक्षित रखा गया है  है।

उपरोक्त आंकड़ों से पता चलता है कि मुस्लिम बहुल चुनाव क्षेत्रों को अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित कर दिया गया है और जहाँ पर मुस्लिम कम हैं और अनुसूचित जाति के लोग ज्यादा हैं वहाँ पर कोई आरक्षण नहीं है।