J.N.U राष्ट्र विरोधी या नव उन्मेषि ?

RSS के मुखपत्र ”पाञ्चजन्य” के अनुसार J.N.U नक्सली और हिंदू विरोधी गतिविधियों का केंद्र है। पत्र के अनुसार यहाँ जवानों की मौत पर त्यौहार सरीखा माहौल होता है। पत्र J.N.U को नक्सल गतिविधियों का प्रमुख अड्डा भी मानता है।

मौजूदा वक्त में केंद्र की सरकार पर चौतरफ़ा हमला किया जा रहा है। नीतिगत मुद्दों पर विपक्ष हमलावर है तो विचारगत मुद्दों पर वाम-बुद्धिजीवि लेकिन विचारणीय सवाल यह है कि क्या विरोध के स्वर को राष्ट्र विरोधी या नक्सल समर्थित कहकर दबाया जा सकता है? विचार व शोध की दिशा में J.N.U का अपना महत्व है। अगर ऐसा है जैसा मुखपत्र में कहा गया है तब यह क़ानून व व्यवस्था का विषय है जिसे ‘पाञ्चजन्य’ के द्वारा नहीं बल्कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत देखा जाना चाहिए। सवाल इससे भी कुछ आगे और गंभीर है।

आज देश में एक अजीब तरह का माहौल है। वैचारिक भिन्नता के लिए जगह सिकुड़ती जा रही है। विभिन्न कुतर्क के सहारे समस्या का सरलीकरण अथवा साधारणीकरण किया जा रहा है। J.N.U को नक्सली गढ़ कहना उसी का उदाहरण है। नक्सलियों के गढ़ के बारे में पत्रिकाओं में नहीं लिखा जाता बल्कि कार्यवाही होती है। ऐसा कहकर उग्र दक्षिणपंथी विचारधारा द्वारा अपने विरोध में उठने वाली आवाज़ को सिरे से कुचलने का प्रयास है।

ऐसा करते हुए उन्होने पल भर के लिए भी नहीं सोचा की इस तरह से उच्च शिक्षण संस्थाओं पर इस तरह का घटिया आरोप शिक्षण पद्धति को कुंठित करेगा? शिक्षण एक स्वस्थ वातावरण व उन्मुक्त व्यवहार के निर्माण की प्रक्रिया है, क्या कोई इसलिए राष्ट्रविरोधी घोषित किया जा सकता है क्योंकि वह आपकी विचारधारा का नहीं है? ऐसा करके आप नक्सलवाद की मूल समस्याओं को भी प्रायोजित घोषित कर रहे होते हैं, जो की विकास मॉडल की खामियों से उपजा है।

क्या कारण है की 15 साल से सत्ता में क़ाबिज़ रमण सिंह सरकार के शासन में नक्सली गतिविधियाँ बढ़ती ही जा रही हैं? श्रीमान दमन से दमित की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। हिन्दुस्तान आज विकास के माडल पर बहस चाहता है, देश आज अभिव्यक्ति की युक्तियुक्त प्रतिबंध पर बहस चाहता है, कला और संस्कृति के लिए उन्मुक्त वातावरण चाहता है। लेकिन बदले में आप भय, डर और असहिष्णुता का माहौल पैदा कर रहे हैं। विरोध में उठने वाली हर आवाज़ आपको पाकिस्तान से आती प्रतीत हो रही है।

तार्किकता की सोच को हिन्दुस्तान की फ़िज़ा में फैलाने का श्रेय J.N.U को जाता है। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि यह सवाल आप तब उठा रहे हैं जब आप छात्रसंघ चुनाव में एक सीट भी जीत जाते है। इसका मतलब है की आपने 850 जो वोट पाए हैं वो नक्सलियों के वोट हैं। श्रीमान तर्किक्र्ता को अंधभक्तवादिता से नहीं दबाया जा सकता. विचार कीजिएगा, आपको भी समझ आ जाएगा की J.N.U नव उन्मेषि है, नक्सली नहीं.जितना J.N.U विपरीत विचारों के लिए उदार है काश! हिन्दूस्तान की समस्त फिज़ा वैसी ही उदार होती। Rss को पता नहीं ये बात कब समझ में आएगी की जिस संस्कृति की झंडा वो उठाए हुए है वह अपने कलेवर में उदारता के चरम पर स्थित है। आपसे बस इतना निवेदन है की आप इसमें विष-वपन मत कीजिए।

[author image=”http://www.aapkatimes.com/wp-content/uploads/2015/11/Rahul-Raj-Aryan.jpg” ]Rahul Raj Aryan, a university gold medallist and a national level debater who is pursuing M.A. from Hindu College, Delhi University. Brilliant speaking and writing skills with a good command on Hindi Language.[/author]