दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र दिलाएँगे किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ

हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है  और लगभग 71% जनसंख्या कृषि उद्योग से  जूरी है|इसी महत्ता को देखते हुए हमारे स्वर्गीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने नारा दिया “जय जवान जय किसान”|अगर जवान सरहद पर अपना खून बहाकर देश की रक्षा करता है तो हमारा किसान खेतो मे अपना पसीना बहाकर लोगो का पेट भरता है|
भारत  के  किसान भारत के आन है शान है एवम जान है। फिर भी उन्हें अपना भरण-पोषण करने के लिए कई कठिनाइयों का सामना करना परता है। है। देश में कृषि की इतनी बरी महत्ता होने के बाबजूद  किसान आज भी किसान  प्रकृति के दया पर निर्भर है।  इन्ही सभी हालातो को नजर में रखते हुए भारत सरकार ने कई योजनाओ को लागु करने का दावा किया है। योजना जैसे-पूसा कृषि,डिजिटल मंडी योजना,मिट्टी की जाँच,क्रॉप इन्सौरन्स तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की स्थापना की है इस योजना से सभी प्रकार के होने वाले प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान की भरपाई की जाएगी।
इस योजना के तहत फसल के विभिन्न अवस्थाओ जैसे-बुआई,रोपण,अंकुरण का जोखिम,फसल के मध्य में मौसम से हानि एवम कटाई उपरान्त आपदा जैसे जलभराव को शामिल किया गया है। बुआई न हो पाने की स्थिति में कुल बिमा राशि का 25% दिया जायेगा। इसका लाभ उन्ही कृषको को मिलेगा जिसने आपदा स्थिति से पहले अपना प्रीमियम जमा कर दिया है। मध्य फसल के दौरान मौसम की प्रतिकूल परिस्थिति के कारण अनुमानित उपज से 50% उपज कम रहने पर 25% बीमा दावा देय होगा। फसल कटने के 14 दिन तक यानी फसल सूखने तक फसल बेमौसम वर्षा या चक्रवात के कारन नष्ट होती है तो कृषक के खेत को बिमा इकाई मानकर क्षतिपूर्ति की गणना की जाएगी। ग्राम पंचायत के स्तर पर किये गए फसल कटाई के प्रयोगों से उपज में हानि का आकलन करके दावा निर्धारण किया जायेगा। ऋणी किसानो का दावा बीमा कम्पनी द्वारा उनके बैंक को तत्पश्चात बैंक द्वारा उनके खाते में हस्तांतरित किया जायेगा।। अऋनी किसानो का दावा सीधे बीमा कम्पनिओ से मिलेगा। योजना के अन्तर्गत कृषि द्वारा स्थानिक आपदा एवम फसल कटाई के उपरांत हुए नुकसान की जानकारी 48 घंटो के भीतर जिला प्रशासन,राजस्व विभाग या कृषि विभाग से टोल-फ्री नं०-18002660700 पर सूचित की जाएगी।
उसके उपरांत बिमा कंपनी 10 दिनों में सर्वे करवाएगी एवम रिपोर्ट मिलने के 15 दिनों में बिमा दावा उपलब्ध करवायेगी। इस योजना में तकनीक के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया गया है। उपग्रह एवम ड्रोन के माध्यम से खेती की उपज एवम स्थानिक आपदाओ पर निगरानी रखी जाएगी ताकि नुकसान का शीघ्र आकलन हो पाये,एवम पीरीत किसानो किसानो को बिमा का लाभ मिल पाये। इस योजना की मुख्य विशेषताएँ ये है कि इसका प्रीमियम कम है जिससे सभी स्तर के किसान भर सकते है। जैसे-खरीफ 2.0% रब्बी 1.5% एवम व्येब्सायिक एवम उद्यानकी 5.0% ताकि प्रतेक किसान इस योजना का लाभ उठा सके ।
इस फायेदेमंद बीमा योजना को किसानो तक पँहुचाने के लिए सरकार ने कुछ बीमा कम्पनिओ को चुन है जिसमे ह्ड़फ्क अर्गो को मुख्य माना है। इस योजना से लाभ के लिए सभी बैंको को अपने ऋणी किसानो का बीमा कराना अनिवार्य है। तथा वे बैंक जाकर सूनिश्चित कर सकते है।अऋणी किसान जो अपना जमा पूँजी लगाकर खेती करते है उनके लिए बीमा अत्यंत आवश्यक है। अऋणी किसान ये योजना बैंक,एजेंट,सी. एस. सी एवम अच. दी. एफ. सी इरगो या सीधे बीमा कंपनी से प्राप्त कर सकते है।ऋणी एवम अऋणी दोनों तरह के किसानो के प्रीमियम एवम सरकारी दरे सामान है।अऋणी किसानो को प्रधानमंत्री फसल बीमा  योजना में शामिल होने के लिए उन्हें कुछ दस्तावेज शामिल कराने परते है। यह योजना केवल सही बीज,सही खाद्य एवम सही कृषि तकनीक का उपयोग करने के वाबजूद भी यदि नुकसान होता है तो बीमा किसानो का बचाव कर सकता है।
भारत में जनसंख्या के अनुपात में अनाज एवम सब्जिओ के पैदावार को लगातार बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र में कई तरह के तकनीकी उपायों की शुरुआत की गयी है। साथ ही कृषि क्षेत्र में तकनीकी  उपायों के ज्यादातर विकास से भारत में औद्योगिक विकास को भी बल मिला। जिससे कृषि को व्यापक पैमाने पर भारतीय अर्थवयवस्था का और भी मजबूत हिस्सा बनाया जा सके। किसानो के सामने आने वाली सिचाई समस्या के निदान के लिए तकनीक का इस्तेमाल व्यापक पैमाने पर किया गया।सिचाई के लिए आधुनिक तकनीक के उपकरण इसके उदाहरण है। जिन क्षेत्रो में पानी की कमी की वजह से कभी खेती करना मुश्किल नजर आता था वह तकनीक के इस्तेमाल से खेती को संभव बनाया गया। तकनीक को कृषि के साथ जोर से भारत में शुरुआत 1966 में नयी कृषि रणनीति के तहत की गयी थी।
आज तकनीक से जहाँ कृषि का उत्पादन कई गुना बढ़ गया है वही कृषि के बदौलत कृषि तकनिकी उपकरणों की भारत में एक अलग इंडस्ट्री भी आगाह ले चुकी है। कृषि में तकनीक के समावेश से भारत में उcच उपज देने वाले कई किस्म के बीजों ,खाद्यो एवम कीटनाशको का उत्पादन शुरू हुआ।इस उपाय को पहले भारतीय अर्थव्यवस्था और घरेलु उत्पादन क्षमता के भीतर अमल में लाया गया। फिर जरुरत को देखते हुए कृषि रणनीति में आयत पर ध्यान दिया गया। जिससे भारत में भी विकशित एवम विकासशील देशो में अपनाया जाने वाले तकनीकी उपकरणों को भारतीय किसान तक पँहुचाया जा सके।
विज्ञान एवम तकनीक के साथ-साथ पोषक इंजीनियरिंग के तालमेल से जल संरक्षण एवम सदाबहार झीलों का उत्त्थान संभव हो सका। हार ड्राप ड्रिलिंग तकनीक ,रिमोट सेंसिंग एवम्  साधारण पानी पम्पो के जरिए ग्रामीण क्षेत्रो में साफ पीने के पानी को सुचारू बनाया गया। वैज्ञानिक उपायों से ग्रामीण उर्जा तन्त्रो को बरी कामयाबी मिली है। बायोगैस एवम सौरउर्जा इसके अहम उदाहरण है।तकनीक के कृषि क्षेत्र पर दुसरे अप्रत्यक्ष लाभ भी है जिनमे खेती से जुरे लोगो के बेहतर स्वास्थ्य के लिए देश में ही सस्ती दवाइयों का निर्माण किया गया।फुड-कम पोर्तिफिकेसन एप्रोच से पोषक तत्वों की कमी से होने वाले इलाज के लिए आज बहुत कम कीमत पर दवाइया उपलब्ध है। कृषि में तकनीक का इस्तेमाल विकास का ही नतीजा है,आज भारत कृषि उत्पादन मे स्वाबलमबी देश है| कभी अनाज का आयत करने वाला भारत आज अनाज का नियत निर्यातक बन गया।

स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज  का किसान भाइयो को एक तोहफा

इस प्रकार सरकार ने किसान के हिट के लिए अनेक योजनाए बनाई है परंतु सही जानकारी के अभाव के कारण हमारा किसान इन योजनाओ के लाभ से वंचित रह जाता है| इन सब योजनाओ का लाभ किसानो को दिलाने के लए दिल्ली विश्विधयालय के इनोवेशन डेस्क की सहायता से स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज के प्राध्यापक डॉक्टर मुकेश राणा,डॉक्टर दलजीत सिंह के निरक्षण मे छात्रो की टीम द्वारा इस दिशा मे प्रयास किया जा रहा है|जिससे किसान सरकारी योजनाओ से अवगत हो सके|कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रकाशवीर खत्री ने इस प्रयास की सराहना की है |और बताया कि किसान इन सब योजनाओ के बारे मे जानकार जायेदा से जायेदा पैदावार उत्पन्‍न करके देश की अर्थव्यवस्था को सुदृध बना सकता है|
डॉ. दलजीत सिंह, डॉ. मुकेश राणा, डॉ. अजय कुमार के साथ कुछ विधयार्थी
डॉ. दलजीत सिंह, डॉ. मुकेश राणा, डॉ. अजय कुमार के साथ कुछ विधयार्थी