DU में नहीं चली केजरीवाल की झाडू

यह तो नहीं कहा जा सकता की DUSU चुनाव में आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई CYSS ने मज़बूती से अपनी लड़ाई लड़ी मगर यह कहना ग़लत नहीं होगा की विश्वविद्यालय में CYSS ने अपना पक्ष काफ़ी मजबूती से रखा ! यह मजबूती बाहुबल से दिखी या नहीं यह निर्णय तो छात्रों पर ही छोड़ दें मगर अर्थबल का प्रयोग कितनी मज़बूती से हुआ इसका जवाब तो दिल्ली के सभी बस स्टॉप, कालेज की दीवारें- फर्श, इलेक्ट्रीक पोल्स आदि चीख चीख कर दे रहीं हैं! CYSS के हर सीट पर विजयी पक्ष से 5000- 7000 वोट्स दूर रहना एक आपदा नहीं एक सबक है, सबक है अपनी बात पर न बने रहने का, सबक है मुद्दों से भटककर राजनीति करने का! छात्रों से जब CYSS के बारे में बात की गई तो उनका जवाब नकारात्मक मिला भले ही इसके की वो AAP के कितने बड़े समर्थक हैं! भले ही उन्हें CYSS, AAP की छात्र इकाई होने का परिचय प्राप्त था मगर CYSS में उन्हें AAP की परछाई नहीं दिखी. जो लोग समर्थक नहीं थे उन्हें भी शुरूआत में DU में बदलाव के चिन्ह दिखे ज़रूर थे पर छिलका हटने के बाद उन्हें केले के सड़े होने की सच्चाई महसूस होती नज़र आई । DU ROCKS नाम के एक कॉन्सर्ट का आयोजन करवाया गया साथ ही चाय पार्टियाँ दी गई और कैंटीन/रेस्टोरेन्टस् फ्री करवाए गये इन चीज़ों ने बदलाव के चेहरे पर कालिख पोतने का काम किया और बदलाव की ओर निहारती आँखों ने “एक ही थाली के चटटे- बट्टे” कहकर आँखें बंद करनी शुरू कर दी । गुप्त सूत्रों की मानें तो CYSS की हार में पार्टी द्वारा ग़लत उम्मीदवारों के चयन को हार का दोषी माना जा रहा है. साथ ही जिस पूर्वांचल और जाट फैक्टर को हथियार बनाकर टीम लड़ना चाहती थी उसे भी अन्य पार्टी द्वारा उतारे गये उम्मीदवारों ने काट दिया. ना सिर्फ़ यही, AAP के विधायक, युवा इकाई और नेता उतर कर DU की धरती पर आ गये और पार्टी का प्रचार- प्रसार किया. टिकट आवंटन एवम् पद-प्रत्याशी की भूमिका के आवंटन पर भी सवाल उठाया जा रहा है । एक समय जीत की और अग्रसर पार्टी का इतना बुरा हश्र होना एक सबक भी है, और चिंता का सबब भी. DU की गतिविधियों में छात्रों का अच्छा चुनना नहीं रह गया था, चुनना था तो कम बुरा । आख़िरकार लोगों ने कम बुरा को दरकिनार कर दिया यह DU के लिए चिंता का सबब है. DU के परिपेक्ष्य में इस प्रकार के पब्लिसिटी सही ही मानी जाती रही, मगर CYSS पर कभी युवाओं को दारू पिलाने जैसे हथकंडों में शामिल नहीं पाया गया. हालाकीं DUSU चुनाव-2015 CYSS हार चुकी है मगर CYSS के भविष्य की शुरूआत यहीं से है. जिस बदलाव से चुनाव परिणाम ने मुख मोड़ लिया कल को इसी बदलाव को अपने लबों की हँसी बनाकर DU मुस्कुराएगी. बस अब तो यही उम्मीद है. जय हिंद|