मुस्लिमों ने दिया कांग्रेस का साथ,दो सीटों पर रही दूसरे नंबर पर.

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नई दिल्ली। कांग्रेस के खिलाफ लहर और आम आदमी पार्टी की आंधी के बावजूद मुस्लिम समुदाय ने कांग्रेस को अपना समर्थन दिया है। कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा चुनाव के लिए छह मुस्लिम चेहरो को मैदान में उतारा था जिसमें से चार जीत गए हैं। चार में से तीन विधायक पिछली बार की तुलना में अधिक वोटों से जीते हैं।
कांग्रेस ने सीलमपुर, मटिया महल, बल्लीमारान, मुस्ताफाबाद, ओखला और बाबरपुर से मुस्लिम उम्मीदवारों पर भरोसा जताया था। जिसमें से मटियामहल और बाबरपुर में ही कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा। मुस्ताफाबाद से हसन अहमद 1896 वोटों से जीते हैं। 2००8 चुनाव की तुलना में उनकी जीत का अंतर लगभग दो गुना हो गया है। गत चुनाव में वह 979 वोटों से विजयी हुए थे। साथ ही उनको मिलने वाले मतों में भी पिछली बार की तुलना में इजाफा हुआ है। इस बार उन्हें 16412 वोट ज्यादा मिले हैं। वहीं बल्लीमारान से पांचवीं बार निर्वाचित हुए हारून यूसुफ ने भी गत बार के मुकाबले अपने जीत के अंतर में करीब 1859 वोटों की बढ़ोतरी की है। इस बार उन्होंने 8०93 मतों के अंतर से विजय प्राप्त की है। आरजेडी से कांग्रेस में शामिल हुए ओखला से विधायक आसिफ मोहम्मद खान ने भी धमाकेदार जीत दर्ज की है। 2००9 के उपचुनाव में वह 5००7 वोटों से जीते थे तो इस बार 26545 वोटों से जीते हैं। खान को 2००9 के उपचुनाव में कुल 23394 वोट मिले थे। वहीं इस बार 5०००4 वोट मिले हैं। सीलमपुर से लगातार पांचवीं बार और कांग्रेस के टिकट पर तीसरी बार जीतने वाले मतीन अहमद भी 21728 वोटों से जीते हैं।
वहीं बाबरपुर और मटिया महल विधानसभा क्षेत्रो की बात की जाए तो इन दोनों सीटों पर भी कांग्रेस के मुस्लिम उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहे हैं। बाबरपुर में कांग्रेस को मिले वोटों में इस बार 8०41 वोटों का इजाफा हुआ हैं। जहां 2००8 में कांग्रेस को यहां से 21632 वोट मिले थे वहीं इस बार जाकिर खान को 29673 वोट मिले हैं। पिछली बार कांग्रेस का उम्मीदवार यहां से तीसरी नंबर पर रहा था। लेकिन इस बार दूसरे नंबर पर है। साथ ही मटिया महल से कांग्रेस के मिर्जा जावेद अली को 19841 वोट मिले हैं। इस बार 1971 वोट कांग्रेस को ज्यादा मिले हैं।