छात्रसंघ के लिए तरसता जामिया मिलिया इस्लामिया

जामिया मिलिया इस्लामिया:
जामिया मिलिया इस्लामिया उन चुनिंदा विश्वविद्यालयों में से एक है जिनको अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त है। शिक्षा, फिल्म, उद्योग जगत और पत्रकारिता से लेकर खेल जगत तक में इसका अहम योगदान है। लेकिन जामिया में छात्र संघ की अनुपस्थिति इसकी पूर्णता पर प्रश्नचिन्ह लगाती है। छात्र अपनी समस्याएं कहीं उठा सकें, ऐसा कोई मंच यहां नहीं है। यहां के छात्रों की प्रमुख समस्याएं हैं- सेंट्रल कैंटीन के खाने में गुणवत्ता की कमी, हर साल फीस संरचना में वृद्धि होना, विश्वविद्यालय के अस्पताल में पर्याप्त दवाओं का न होना, लाइब्रेरी में किताबों की कमी आदि।

विश्वविद्यालय में पचास प्रतिशत से ज्यादा छात्र दूसरे प्रदेशों से हैं और हॉस्टल बस हजार बच्चों के लिए है। बाहर से आने वाले छात्रों को रोज किसी न किसी समस्या से दो चार होना पड़ता है। मकान मालिकों की मनमानी, असुरक्षित माहौल, खाने की खराब गुणवत्ता आदि रोजमर्रा की समस्याएं हैं। इन समस्याओं को उठाने वाला कोई नहीं है। इससे छात्रों के अंदर असंतोष की भावना पैदा होती है। जामिया में पिछला छात्रसंघ चुनाव 2006 में हुआ था। उस वर्ष परवेज आलम अध्यक्ष पद के लिए चुने गए थे। जामिया में छात्रसंघ चुनाव बंद होने के कई कारण हैं। जामिया अध्यापक संघ के अध्यक्ष बादशाह आलम खान के अनुसार इसकी प्रमुख वजह विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच टकराव की स्थिति थी। दूसरे जामिया में छात्रसंघ चुनाव में पार्टी सिस्टम नहीं है। इस वजह से यहां छात्रों में एकजुटता की कमी है। जामिया अध्यापक संघ छात्रसंघ चुनाव कराने के पक्ष में है। उसका मानना है छात्रसंघ की अनुपस्थिति में छात्रों के लोकतांत्रिक मूल्यों का हरण हो रहा है। दूसरी ओर हिंदी के साहित्यकार और सेवानिवृत्त प्रोफेसर असगर वजाहत की राय थोड़ी अलग है। उनका कहना है कि ‘लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुसार छात्र संघ चुनाव अवश्य होने चाहिए लेकिन जामिया में इसके अतीत और इसके कार्य सराहनीय नहीं रहे। चुनकर आने वाले प्रतिनिधि छात्रहितों को ध्यान में न रखकर अपनी राजनीतिक जमीन बनाने में लग जाते हैं।’

पिछले वीसी नजीब जंग ने इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया। 2012 में दिल्ली हाईकोर्ट ने जामिया में छात्रसंघ चुनाव कराने का आदेश दिया था लेकिन प्रशासन ने सब्जेक्ट एसोसिएशन बनाकर अपना पल्ला लिया जो सही प्रक्रिया नहीं थी। नवनियुक्त वाइस चांसलर तलत अहमद ने अपनी पहली प्रेस कॉन्फें्रस में छात्रसंघ चुनाव कराने पर बल दिया था। इस बाबत छात्रों की राय छात्रसंघ के पक्ष में है। होटल मैनेजमेंट के प्रथम वर्ष के छात्र फैसल लतीफ के अनुसार छात्रसंघ होना चाहिए क्योंकि ये छात्रों का हक है। ज्योग्रॉफी के द्वितीय वर्ष के छात्र सुधांशु भी चाहते हैं कि छात्रसंघ होना चाहिए ताकि छात्रों की समस्याएं उठाई जा सकें। छात्रा समीक्षा का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में बहुत बदलाव की जरूरत है, इसलिए ऐसा छात्रसंघ चाहिए जो सही दिशा में काम करे। बीटेक के छात्र फैयाज सहित अधिकांश छात्र छात्रसंघ चुनावों के पक्ष में हैं।

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